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गेहूं के रिकार्ड उपार्जन पर खाद्य मंत्री ने किया अभिनंदन

सागर। वंदे भारत लाईव टीवी न्यूज रिपोर्टर सुशील द्विवेदी।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा किसानों के हित में न्यूनतम समर्थन मूल्य के अतिरिक्त 175 रुपये प्रति क्विंटल बोनस की घोषणा के परिणामस्वरूप रबी विपणन वर्ष 2025-26 में लगभग 9 लाख किसानों से 77 लाख 75 हजार मीट्रिक टन गेहूँ का उपार्जन किया गया है। उन्होंने बताया कि गत वर्ष 48 लाख 38 हजार मीट्रिक टन गेहूँ का उपार्जन हुआ था। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्गोविंद सिंह राजपूत ने इंदौर में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में किसानों के हित में मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा दिये गये बोनस एवं उसके बाद हुए रिकार्ड गेहूँ उपार्जन पर उनका अभिनंदन कर आभार व्यक्त करने के साथ लोकहित में कार्य करने के लिए लोकमाता की प्रतिमा भेंट की। उन्होंने बताया कि गेहूँ के उपार्जन में मध्यप्रदेश देश में दूसरे स्थान पर है।
एक लाख से अधिक महिला किसानों से 8.98 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का उपार्जन मंत्री राजपूत ने बताया कि गेहूँ का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2425 रूपये है और राज्य सरकार द्वारा 175 रूपये प्रति क्विंटल बोनस दिया गया है। इस तरह से गेहूँ का उपार्जन 2600 रूपये प्रति क्विंटल की दर से किया गया है, जो कि देश में सर्वाधिक है। उन्होंने बताया कि 9 लाख किसानों में से 1 लाख 23 हजार महिला किसानों द्वारा 8 लाख 98 हजार मीट्रिक टन गेहूँ का विक्रय किया गया है। समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन हेतु 3623 केन्द्र खोले गए जिसमें से 293 केन्द्र महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा संचालित किए गए, इससे महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिला। महिला किसानों के खाते में 2 हजार 335 करोड़ रूपये का बोनस सहित भुगतान किया जा चुका है। किसानों के खातों में कुल 19 हजार 322 करोड़ रूपये का भुगतान किया जा चुका है। रबी विपणन वर्ष 2025-26 में गेहूं उत्पादक किसानों की सुविधा के लिए समिति स्तरीय 3 हजार 176 पंजीयन केन्द्रों के अतिरिक्त 9311 एमपी ऑनलाईन, कॉमन सर्विस सेन्टर, लोक सेवा केन्द्रों, पंचायतों के केन्द्रों के साथ-साथ किसान द्वारा स्वयं पंजीयन करने की सुविधा उपलब्ध कराई गई। समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन के व्यय को सीमित करने हेतु 2440 केन्द्र गोदाम स्तरीय बनाए गए जिससे परिवहन एवं हैण्डलिंग व्यय की बचत हुई है। समर्थन मूल्य का लाभ बिचौलियों/व्यापारियों द्वारा समर्थन मूल्य का लाभ प्राप्त करने से रोकने हेतु इस वर्ष बायोमेट्रिक / ओटीपी आधारित किसान पंजीयन की व्यवस्था की गई। किसानों द्वारा विक्रय उपज के समर्थन मूल्य की राशि उनके बैंक खाते में निर्बाध रूप से भुगतान किया जा सके, इसलिए कृषक के आधार लिंक बैंक खाते में भुगतान की व्यवस्था की गई है। कृषक द्वारा स्वयं उपार्जन केन्द्र का चयन कर उपज विक्रय के लिये स्लॉट बुकिंग की व्यवस्था की गई। उपार्जन करने वाली समितियों को दैनिक व्यय की पूर्ति हेतु मंडी लेबर व्यय का भुगतान प्रतिदिन किसानों के भुगतान के साथ-साथ करने की व्यवस्था की गई है। शनिवार एवं अन्य अवकाश के दिनों में किसान द्वारा अपनी उपज विक्रय के लिए उपार्जन केन्द्र पर लाने पर खरीदी की गई। इस वर्ष पंजीयन 20 जनवरी 2025 से शुरू कर दिया गया जो उपार्जन शुरू होने के के बाद तक अर्थात 9 अप्रैल तक चलता रहा। इस प्रकार, पिछले वर्ष की तुलना में पंजीयन के लिए ज्यादा समय दिया गया।Screenshot 20250521 2138432

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